चंबा: विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर चंबा के चमीणू स्थित एचटूओ हाउस (H2O House) में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘नाट आन मैप’ (Not On Map) और ‘पहाड़’ ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित न रहकर, पारंपरिक ज्ञान, देसी बीजों और प्राकृतिक जीवनशैली के संरक्षण को बढ़ावा देना था।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में पारंपरिक वैद्यों, देसी बीजों के संरक्षकों और जैविक खेती के विशेषज्ञों ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करवाई।
प्राकृतिक खेती और प्राचीन उपचार पर हुआ मंथन कार्यक्रम में चंबा के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों— प्लयूर, सिल्लाघ्राट, चंबी, धार, भाट और साव— से आए लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई:
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स्थानीय जड़ी-बूटियों की पहचान और उनके उपयोग।
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घरेलू उपचार की प्राचीन और प्रामाणिक विधियां।
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प्राकृतिक और जैविक खेती का महत्व।
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पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism)।
कृत्रिम जीवनशैली के दौर में पारंपरिक हीलर्स की अहमियत
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आज जब दुनिया रसायनों और कृत्रिम जीवनशैली की ओर भाग रही है, तब हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पारंपरिक ‘हीलर’ (वैद्य) प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने की राह दिखा रहे हैं। पहाड़ों का यह पारंपरिक ज्ञान केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त आधार भी है।
इस आयोजन में युवा पीढ़ी की भागीदारी भी सराहनीय रही। रीना, रेखा, इमानी, ज्योति, अंकिता, हीना और अनिल जैसे जागरूक युवाओं के साथ-साथ शेर सिंह, राजेश, सिद्धार्थ और मगनदीप ने भी अपने विचार साझा किए। वहीं, भूरि सिंह संग्रहालय चंबा के क्यूरेटर सुरेंद्र, कर्मण्य जसरोटिया और विकास के साथ अमर सिंह, अमरो, गजेंद्र सिंह, बशीर और मुहम्मद हुसैन जैसे अनुभवी ग्रामीणों ने प्राचीन उपचार पद्धतियों के अपने अनुभव साझा कर उपस्थित लोगों को प्रेरित किया।
“हमारी वास्तविक विरासत केवल इमारतों तक सीमित नहीं है”
“हमारी वास्तविक विरासत केवल इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ज्ञान है जो हमारे बुजुर्गों ने प्रकृति के साथ रहकर सीखा है। आधुनिकता के इस दौर में हमें अपनी जड़ों और पारंपरिक ज्ञान को विस्मृत नहीं करना चाहिए। आज सबसे बड़ी आवश्यकता नई पीढ़ी को इस अनमोल विरासत को सीखने और संजोने के लिए प्रेरित करने की है, ताकि भविष्य में वे अपने स्वास्थ्य और जीवन की चुनौतियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से स्वयं समाधान निकाल सकें।” > — मनुज शर्मा, सह-संस्थापक, नाट आन मैप
धरोहर सहेजने का सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा को सहेजने का संकल्प लिया। उपस्थित ग्रामीणों ने प्रण लिया कि वे न केवल स्वयं इन पारंपरिक विधियों का पालन करेंगे, बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से लुप्त हो रहे ज्ञान को एक नया जीवन मिलता है। आयोजकों ने विश्वास जताया कि एचटूओ हाउस में हुआ यह संगम केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि चंबा की अमूल्य सांस्कृतिक संपदा को बचाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगा।

