शिमला, 18 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश सरकार ने समाज के वंचित वर्गों, विशेषकर अनाथ बच्चों और विधवाओं के उत्थान के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। राज्य में अब पेट्रोल और डीजल की खरीद पर ‘अनाथ और विधवा उपकर’ (Cess) लगाया जाएगा। राज्यपाल ने ‘हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिसके बाद प्रदेश में इस नए उपकर को लागू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
अधिकतम 5 रुपए प्रति लीटर होगा उपकर
नई व्यवस्था के तहत, राज्य सरकार अब पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की पहली बिक्री पर अनाथ और विधवा उपकर वसूलेगी। सरकार द्वारा समय-समय पर इस उपकर की दरें अधिसूचित की जाएंगी। हालांकि, आम जनता पर अत्यधिक बोझ न पड़े, इसके लिए उपकर की अधिकतम सीमा 5 रुपए प्रति लीटर निर्धारित की गई है।
कल्याण निधि में जमा होगी राशि
इस उपकर के जरिए एकत्रित होने वाली धनराशि सामान्य सरकारी खजाने में जाने के बजाय सीधे ‘अनाथ और विधवा कल्याण निधि’ में जमा की जाएगी। इस विशेष कोष का गठन खासतौर पर इसी उद्देश्य के लिए किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निधि में जमा पूरी राशि का उपयोग केवल राज्य के अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं के कल्याणकारी कार्यों, शिक्षा और उनके पुनर्वास के लिए किया जाएगा।
विधि विभाग ने जारी की अधिसूचना
इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। विधि विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक:
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राज्यपाल की मंजूरी: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने 12 अप्रैल, 2026 को इस संशोधन विधेयक (2026 का अधिनियम संख्यांक 11) को अपनी औपचारिक अनुमति प्रदान की।
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अधिनियम में संशोधन: यह नया प्रावधान ‘हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005’ (VAT Act, 2005) में महत्वपूर्ण संशोधन के माध्यम से लागू किया गया है।
इस फैसले को राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे बेसहारा और जरूरतमंदों को सीधे तौर पर आर्थिक और सामाजिक संबल मिलेगा।

