चंबा : इंसान भले ही चांद पर पहुंच गया हो, लेकिन चंबा जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर दूर स्थित जटकरी पंचायत के लोग आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। सड़क न होने के कारण यहां की जिंदगी आज भी ‘पालकी’ और खच्चरों के सहारे चल रही है। हालात इतने बदतर हैं कि आपात स्थिति में बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए पालकी ही एकमात्र साधन है। कई बार मरीज समय पर इलाज न मिलने के कारण बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
13 गांव विकास की धारा से कटे
जटकरी पंचायत के 13 गांव— जटकरी, नगाली, हुरेड़, भगियार, धपेई, ताराभूई, जटेड़, डाडरा, छपरोटा, पनैली, टिकर, थनौड़ा और मनखंडा— आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। विशेषकर भगियार, डाडरा और छपरोटा जैसे दूरदराज के गांवों के लिए सड़क न होना किसी अभिशाप से कम नहीं है।
शिक्षा और कृषि पर भी भारी असर
सड़क के अभाव का खामियाजा सबसे अधिक छात्रों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है। 12वीं (जमा दो) के बाद उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को रोजाना घने जंगल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर तीन से छह किलोमीटर का पैदल सफर तय कर चंबा पहुंचना पड़ता है। वहीं, आजीविका के लिए नकदी फसलें (मटर, फ्रासबीन, टमाटर, गोभी, मक्की, गेहूं और फल) उगाने वाले किसानों को अपनी उपज खच्चरों पर लादकर शहर की मंडियों तक पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम: खाली लौटाएंगे मतपेटियां
दशकों से शासन और प्रशासन की अनदेखी झेल रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। ग्रामीणों ने अब सामूहिक तौर पर कड़ा निर्णय लिया है कि यदि उनके गांवों को जल्द भाग्य रेखा (सड़क) से नहीं जोड़ा गया, तो आगामी विधानसभा चुनावों में वे मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे और मतदान केंद्रों से खाली मतपेटियां वापस भेज देंगे।
क्या कहते हैं ग्रामीण:
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राज सिंह ठाकुर: लांघा से आगे तीन से छह किलोमीटर सड़क न होने से पंचायत के 13 गांव सड़क सुविधा से महरूम हैं और विकास की धारा से अछूते हैं।
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ऋषि कुमार: इंसान चांद पर जा पहुंचा है लेकिन शहर से सटी जटकरी पंचायत आज भी सड़क की राह ताक रही है। नेताओं ने हमारा इस्तेमाल महज वोट बैंक के रूप में किया है।
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सोनू कुमार: गांव में किसी के बीमार होने पर पालकी ही एकमात्र सहारा बचती है। कई बार तो मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
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अनु कुमार: यदि सड़क सुविधा से पंचायत को पूरी तरह नहीं जोड़ा गया तो आगामी समय में विस चुनाव में हम खाली मतपेटियां वापस भेजेंगे।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का पक्ष:
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नीरज नैय्यर (सदर विधायक, चंबा): पंचायत के गांवों को जल्द सड़क सुविधा से जोड़ने के हमारे पूरे प्रयास रहेंगे। बशर्ते सड़क की जद में आने वाली अपनी जमीन ग्रामीण समय पर विभाग के नाम करें।
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पवन नैय्यर (पूर्व विधायक): लांघा तक सड़क मेरे कार्यकाल में ही बनाई गई थी। कोरोना काल के चलते पूरी पंचायत सड़क से नहीं जुड़ पाई। वर्तमान सरकार सिर्फ पैसों का रोना रोती रहती है, जबकि सड़क के बिना विकास अधूरा है।
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जीत सिंह ठाकुर (अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग): इस मामले में अधिशासी अभियंता से ताजा अपडेट लिया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

